Friday, February 18, 2011

कोई

 शब् भर मेरी पलकों पे जगता है कोई
मेरे तनहा सपनो को नीदें दे गया कोई

खुशबू बन के मेरे आसुओं में महकता है कोई
मेरे बे-जुबा दर्द को तन्हाई दे गया कोई

हर लम्हा मेरी धडकनों को सीने से लगाता है कोई
मेरी ठहरी सांसो को आवारगी दे गया कोई

मुसाफिर बन के मेरी यादों में सफ़र करता है कोई
मेरी खुशियों को नए मंजिल दे गया कोई

अहसास बन के मेरी ज़िन्दगी को चूमता है कोई
उम्मीद बन के मेरी मौत को जीने की खवाहिश दे गया कोई

हमसफ़र बन के अंधेरों में साथ चलता है कोई
मोहब्बत बन के लबो से "नाम" को छू गया कोई

अशोक "नाम"

Thursday, December 9, 2010

कुछ अशआर

खामोश रात

खामोश रात जब तन्हाई में रोती है
उनकी याद शबनम बन के पलकों पे उतरती है

ये ज़िन्दगी जब मौत के सफ़र पे निकलते है
धड़कन दर्द बन के दिल की दहलीज पे पिएघलती है

अशोक "नाम"

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कोई

कोशिश दर्द को छुपाने की करता है कोई ...

लबो पे फ़साना लाने से डरता है कोई ...

सफ़र में जो साथ था मंजिल पे आके भूल जाता है कोई ...

हर लम्हा हर पल यादें पलकों पे छोड़ जाता है कोई ...

अशोक "नाम"


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दर्द--दिल

धडकनों को आंसूओ में भिगोते रहे ,लबो पे मुस्कराहट लाते रहे
दर्द ही दर्द है सांसो में , पलकों पे आपकी तस्वीर लाते रहे

चलते रहे तनहा अकेले बे -खबर , मंजिल को सफ़र में लाते रहे
ख़ामोशी को अपना नसीब मानते रहे , दर्द-ऐ-दिल से गुफ्तगू करते रहे

अशोक "नाम"


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ख़ामोशी

धडकनों में जब दर्द पिएघलता है
पलकों पे वो खवाब बनके उतरता है ...

ज़िन्दगी में जब ख़ामोशी करवट बदलती है
एक आवाज़ सांस बनके जेहन में उतरती है ...

अशोक "नाम"


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बे-रुखी

ज़िन्दगी के इस मोड़ पे ये कैसा वक़्त आया है
दर्द का एक कतरा पलकों पे उतर आया है ...

नहीं रोते थे धडकनों की ख़ामोशी पे
आज आपकी बे-रुखी ने हमें बहुत रुलाया है ...

अशोक "नाम"

Tuesday, November 23, 2010

तलाश-ऐ-आरज़ू

तमाम हो रही है ज़िन्दगी लम्हों के गुजरने के अहसास के साथ
पुकारती है धड़कने तन्हाई में दर्द को पलकों के पास

अजनबी हो रही है मंजिल हमसफ़र के क़दमों की आहट के साथ
गुजरती है सांसें खुशियों के रास्ते लबों के पास

खामोश हो रही है रातें ख्वाबों के सो जाने की उम्मीद के साथ
उठती है लहरें शब्-भर सीने पे नींद के पास

गुमशुदा हो रही है चाहतें तलाश-ऐ-आरज़ू के फ़ना होने के साथ
जलती है शमा हर बार इंतजार में परवाने के पास

हो रही है बेवफा यादें वादों के टूट के बिखरने के साथ
सिसकती है चांदनी चाँद के पहलू में सितारों के पास

हो रही है बेमतलब दुनिया "नाम" के जमीदोश होने के साथ
मुस्कुराती है मौत जन्नत की दहलीज़ पे कफ़न के पास

अशोक "नाम"

मिलता नहीं

होता है हर मजिल का सफ़र ये मालूम है मुझे
मुझको मेरी मंजिल का सफ़र मगर मिलता नहीं

होना है फ़ना एक दिन जलके ये मालूम है मुझे
मुझको तेरी महफ़िल का पता मगर मिलता नहीं

होते है जुदा मुसाफिर मोड़ पे ये मालूम है मुझे
मुझको मेरी ज़िन्दगी का मुकाम मगर मिलता नहीं

होता है महसूस धडकनों को दर्द ये मालूम है मुझे
मुझको तेरी पलकों का किनारा मगर मिलता नहीं

होता है हर लम्हे में सदियों का अहसास ये मालूम है मुझे
मुझको मेरी मौत का वक़्त मगर मिलता नहीं

होती है आहट "नाम" के सीने पे ये मालूम है मुझे
मुझको तेरी ख़ामोशी का सहारा मगर मिलता नहीं

अशोक "नाम"

come to me for life

when I feel pain
your hands are so wide

I hear the same
when you say through your eyes

when you smile in soft
I feel my heart-beats closer your heart

No more reason
No real dreams
just show me the way
how I feel you near

I hear the same
when you say through your eyes

when I do wrong
I like you'll be right
you'll be mine
now. always, forever

No more closeness
No real deepness
just ask me in the way
you feel me through your tears

I hear the same
when you say through your eyes

when I feel alone
I hate to live more
come to me for life
make me alive forever

No more wait
No real faith
just love me in the way
you make me happy through your lips

I hear the same
when you say through your eyes


ashok lalwani

Wednesday, November 17, 2010

आंसुओ की सदा

कुछ कतरे बचे है धडकनों में दर्द के
पलकों से आंसुओ की सदा फिर आती क्यों नहीं

कुछ उम्मीदें बची है ज़िन्दगी में मौत की
तन्हाई में यादों की महक फिर आती क्यों नहीं

कुछ रास्तें बचे है सफ़र में मंजिल के
हमसफ़र के कदमो की आहट फिर आती क्यों नहीं

कुछ फासले बचे है आलम में नजदीकियों के
उस शख्श के आने की उम्मीद फिर आती क्यों नहीं

कुछ लम्हे बचे है सीने पे वक़्त के
सदियों के गुजर जाने की चाहत फिर आती क्यों नहीं

कुछ इरादे बचे है मुहब्बत में "नाम" के
लबों पे खुशियों के बहार फिर आती क्यों नहीं

अशोक "नाम"

Tuesday, November 16, 2010

अश्कों के मोती

चाँद गुनगुनाने लगा, सितारें गीत गाने लगे
जब आपकी यादों के बादल सीने पे उतरने लगे

महफ़िलें सजने लगी, शमाओ के दिल जलने लगे
जब आपके दर्द के अफसाने पलकों पे मचलने लगे

हवाओं में नशा घुलने लगा, मौसमों के रंग बदलने लगे
जब आपके अह्स्कों के मोती लबों को चूमने लगे

धडकनों के किनारे धूआ उतने लगा, सांसों के सफ़र थमने लगे
जब आपको आपके अपने साये अजबनी लगने लगे

वफाओं में ख़ामोशी छाने लगी, वादों के परिन्दें उड़ने लगे
जब आपकी तनहा मंजिलें मोड़ पे आके सिसकने लगे

सीने पे रातें जागने लगी, क़दमों के निशां मिटने लगे
जब आपके ख्वाब "नाम" की ज़िन्दगी होने लगे

अशोक "नाम"